मप्र में टेस्ट टयूब से तैयार होंगे सागौन के पौधे,किसानों का होगा भला

भोपाल। सागौन का उत्पादन कर अपनी आय बढ़ाने की इच्छा रखने वाले प्रदेश के किसानों के लिए यह अच्छी खबर है। प्रदेश में निजी तौर पर सागौन का उत्पादन अब तक इसके बीजों के जरिए किया जाता था,लेकिन इसके उत्पादकों को अब टेस्ट ट्यूब की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले सागौन के पौधे मिल सकेंगे। यह पौधे तैयार करने में वन विभाग को महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार, सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले ये पौधे बीते करीब एक साल से देवास वन मंडल के पुंजापुरा परिक्षेत्र में तैयार किए गए हैं। इस काम में विभाग ने इन्स्टीट्यूट ऑफ फ ॉरेस्ट जेनेटिक्स एण्ड ट्री ब्रीडिंग कोयम्बटूर का तकनीकी सहयोग लिया है।
विभाग का दावा है,कि पौधे तैयार करने के लिए उक्त परिक्षेत्र के करीब ढाई हजार वृक्षों में से पांच धन वृक्षों (पूरी तरह निरोगी वृक्ष)का चयन किया गया। टिश्यू कल्चर पद्धति के जरिए विभाग ने धन वृक्षों के हूबहूू गुणवत्ता वाले ऐसे कई पौधे तैयार करने में सफलता हासिल की है। जो महज एक साल में लहलहाने लगे हैं।
ऐसे तैयार किए गए पौधे

-चयनित धन वृक्षों की शाखाओं को उपचार के बाद पॉलीटनल में रख पहले अंकुरित किया जाता है।
-4 सेमी.तक अंकुरण के बाद इसे एक्सप्लांट करने सतह को एथनॉल से साफ कर 45 दिन तक टेस्ट ट्यूब में रखा जाता है।
-टेस्ट ट्यूब में पौधे के अंकुरण के लिए अधिकतम 25 डिग्री से.का तापमान व 8 से16 घंटे तक प्रकाश जरूरी है।
-एक्सप्लांट से टहनी उभरने पर इसकी 6 से 8 बार उप संवर्धन(सब कल्चरिंग) किया जाता है।
–लगभग 30 से 40 दिनों के बाद 4 से 5 नोड वाली टहनी प्राप्त होने पर करीब 35 डिग्री तापमान व शत-प्रतिशत आर्द्रता वाले नए स्थान पर इनकी कलम(इनोक्यूलेट करना)लगाई जाती है।
यह भी जानें
-वर्तमान में सागौन का उत्पादन इसके बीजों से किया जाता है। जबलपुर स्थित वन अनुसंधान केंद्र में उच्च गुणवत्ता वाले ये बीज तैयार होते हैं।
-देश में होने वाले सागौन का करीब 41 प्रतिशत सागौन मप्र में होता है। प्रदेश के वनों में करीब 18 प्रतिशत सागौन वृक्ष हैं।

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