मप्र :30 हजार से अधिक नवविवाहित जोड़ों ने सरकार से मांगी प्रोत्साहन राशि

भोपाल। वाहवाही लूटने के इरादे से पूर्ववर्ती कमल नाथ सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना की प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर करीब दोगुना तो कर दी,लेकिन 65 प्रतिशत हितग्राहियों को वह इसका भुगतान ही नहीं कर सकी। इन नवविवाहितों ने अब मौजूदा शिवराज सिंह सरकार से उक्त लंबित प्रोत्साहन राशि अदा करने की गुहार की है।
कमलनाथ सरकार ने बढ़ाई थी रकम, लेकिन नहीं कर पाई भुगतान
विभागीय सूत्रों के अनुसार,प्रदेश के सामाजिक सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण विभाग को विभिन्न जिलों से ऐसे ज्ञापन मिल रहे हैं। जिन्होंने राज्य शासन की मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना अंतर्गत विवाह-निकाह तो रचाया लेकिन मदद के नाम पर पिछली सरकार में उसे केवल आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। खास बात यह,कि लगातार कमजोर माली हालत का हवाला देने वाली पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना में प्रोत्साहन राशि 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार रुपए तो कर दी लेकिन ज्यादातर जोड़ों को वह इसका भुगतान नहीं कर सक ी।
कई जोड़े तो ऐसे हैं,जिनका वैवाहिक जीवन ही एक साल से अधिक हो चुका है,लेकिन वे सरकार की मदद पाने से वंचित हैं। कोरोना संकट के चलते इनमें से कई के रोजगार भी छिन चुके हैं। ऐसे में ये जोड़े उक्त रकम की आस में जिला कलेक्टोरेट के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर यह रकम दिलाने की मांग भी की। कलेक्टरों ने समाज कल्याण विभाग को रिमाइंडर भेज कर उक्त राशि की मांग की है। वहीं कुछ जोड़ों ने सीधे मुख्यमंत्री समाधान ऑनलाइन में आवेदन देकर यह राशि मांगी है।
बीते साल 45 हजार जोड़ों ने रचाई शादी
विभागीय सूत्रों के अनुसार,वर्ष 2019-20 में नंवबर से दिसंबर तक ही करीब 45 हजार जोड़ों ने सरकार की इस योजना के अंतर्गत शादियां की। महज दो महीने में इतनी बड़ी संख्या में सरकारी शादियों की एक बड़ी वजह योजना की राशि दोगुना होना है। दरअसल,तत्कालीन कमल नाथ सरकार के वचन के मुताबिक इन जोड़ों को 48-48 हजार रुपये गृहस्थी शुरू करने के लिए प्रोत्साहन राशि के तौर पर मिलना थे। वहीं तीन हजार रुपए उनके विवाह आयोजन पर खर्च किए जाने थे। लेकिन, आर्थिक तंगी का हवाला देकर नाथ सरकार यह राशि नहीं दे पाई।
नए सिरे से भेजा बजट प्रस्ताव
सामाजिक न्याय विभाग ने पूरक बजट में सरकार से 153 करोड़ रुपये भी मांगे थे, लेकिन सरकार सिर्फ 65 करोड़ रुपये दे सकी। वह राशि भी कोषालयों की लचर व्यवस्था के फेर में उलझकर रह गई। बजट की कमी से वे अधिकारी,कर्मचारी भी उलझन में हैं,जिन्होंने अपने स्तर पर व्यवस्था कर सामूहिक विवाह आयोजन तो करा दिए लेकिन प्रति जोड़ा तीन हजार रुपए का भुगतान नहीं होने से अब ये ‘व्यवस्थापकÓ संबंधित दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इसे देखते हुए विभाग ने अब नए सिरे से सरकार को उक्त लंबित भुगतान के लिए प्रस्ताव भेजा है।

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