21 दिनों के लॉकडाउन के बाद BCCI पर IPL रद्द करने का दबाव बढ़ा, बोर्ड कभी भी ले सकता है फैसला

 
नई दिल्ली 

 कोरोना महामारी के बीच मंगलवार का दिन खेल जगत के लिए बेहद सनसनीखेज रहा. टोक्यो ओलंपिक को स्थगित कर दिया गया. दूसरी तरफ कोरोना से निपटने के लिए 21 दिनों के लॉकडाउन की पीएम मोदी की घोषणा के बाद अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को रद्द करने का दबाव बढ़ गया है. मंगलवार को ही बीसीसीआई ने आईपीएल के टीम मालिकों के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल भी टाल दी.

बीसीसीआई ने इस महीने की शुरुआत में आईपीएल को 15 अप्रैल तक निलंबित कर दिया था, तब उसने कहा था कि टूर्नामेंट की मेजबानी केवल स्थिति में सुधार होने पर किया जाएगा. लेकिन स्थिति और गंभीर हो गई. भारत में 550 से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं, जबकि 10 लोगों की मौत हो चुकी है.
 
बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पीटीआई से कहा कि गंभीर स्थिति को देखते हुए उनके पास इस मामले पर कहने के लिए कुछ नहीं है. गांगुली ने कहा, ‘मैं फिलहाल कुछ नहीं कह सकता. हम उसी स्थान पर हैं, जहां हम इसे निलंबित करने वाले फैसला लेते समय थे. पिछले 10 दिनों में कुछ भी नहीं बदला है. ऐसे में मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है.’
 
उधर, किंग्स इलेवन पंजाब के सह-मालिक नेस वाडिया ने अपनी स्पष्ट राय रखी है. उन्होंने कहा, ‘बीसीसीआई को वास्तव में आईपीएल को अब स्थगित करने पर विचार करना चाहिए. हमें बड़ी जिम्मेदारी के साथ काम करने की जरूरत है.’

गांगुली ने आईपीएल के आयोजन पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘मई तक स्थिति में अगर सुधार होता है और मुझे आशा है कि ऐसा होगा तो भी हमारे पास कितना समय रहेगा. क्या तब विदेशी खिलाड़ियों को देश में प्रवेश करने की अनुमति होगी..?'

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘21 दिनों के लॉकडाउन के बाद अब यह लगभग असंभव सा होगा की चीजें सामान्य हों. लॉकडाउन हट गया तो भी 14 अप्रैल के बाद भी बहुत सारे प्रतिबंध जारी रहेंगे. ऐसे में लीग को रद्द नहीं करना मूर्खता होगी.’ 

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा, 'अगर ओलंपिक को एक साल के लिए स्थगित किया जा सकता है, तो आईपीएल उस लिहाज से बहुत छोटी इकाई है. इसे आयोजित करना कठिन होता जा रहा है. इस बिंदु पर सरकार विदेशी वीजा देने की सोच भी नहीं रही है.'

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