भूरिया को डिप्टी सीएम बनाए जाने की उठी मांग

भोपाल
 मध्यप्रदेश के झाबुआ उप चुनाव के रण में कांग्रेस ने बाजी मारी है। यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार कांतिलाल भूरिया ने 27925 वोटों से जीत दर्ज की है। भूरिया ने इस जीत को कमलनाथ की जीत बताया। उन्होंने कहा कि हम अपने क्षेत्र में रेलवे से लेकर, स्कूल, लॉ कॉलेज, मज़दूरों को रोजगार देने से लेकर विकास कार्यों को चार साल में पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि अब भाजपा कांग्रेस को आंख नहीं दिखा सकती। मंत्री बनाए जाने पर उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का अधिकार क्षेत्र है जो जिम्मेदारी मिलेगी उसको निभाएंगे। वहीं, सोशल मीडिया पर भूरिया की जीत के बाद उन्हें डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग भी उठने लगी है।

व्यापमं घोटाले के व्हिसिल ब्लोअर डॉ आनंद राय ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि, 'कांतिलाल भूरिया जी को स्वर्णिम जीत की शुभकामनाएं,उनकी जीत में जयस कार्यकर्ताओ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई खासकर कल्याणपुरा सेक्टर जो कि भाजपा आरएसएस का अभेद किला था उसे जयस ने ध्वस्त कर दिया।सरकार के स्थायित्व में झाबुआ की जीत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।अब कांतिलाल जी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए।'

दरअसल, झाबुआ में आदिवासी नेताओं की पार्टी जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) का दबदबा है। अगर यहां से जयस अपना उम्मीदवार खड़ा करती तो कांग्रेस के लिए यह जीत मुश्किल साबित होती। लेकिन उप चुनाव के समय जयस नेता और कांग्रेस के विधायक डॉ हीरालाल अलावा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकत कर उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला लिया था। उन्होंने यह भी ऐलान किया था कि जयस कांग्रेस को समर्थन देगा और पार्टी के लिए प्रचार करेगा। यही बड़ा कारण है कि कांग्रेस को जीत मिलने में जयस का अहम रोल रहा है। अब देखना होगा की क्या भूरिया को कमलनाथ कैबिनेट में जगह मिलेगी या नहीं। हालांकि, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि भूरिया को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। झाबुआ उप चुनाव के बाद अब कैबिनेट का गठन दोबारा होना है।  पार्टी पर अब समर्थन का दबाव भी कम हो गया है। प्रदेश में अब कांग्रेस की 115 सीटें हैं। जबकि दो निर्दलीय कांग्रेस विधायकों का ही उसे समर्थन प्राप्त है। इसमे प्रदीप जयसवाल और बुरहानपुर के शेरा शामिल हैं। दोनों ही पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े थे।

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