सुशांत केस में मीडिया का ध्यान केंद्रित कर केंद्र सरकार ने लाया किसानों और श्रमिकों के विरोध में कानून – भूपेश

रायपुर
जब पूरे देश की मीडिया का ध्यान सुशांत सिंह राजपूत केस की ओर था तब भाजपा की केंद्र सरकार ने राज्यों के अधिकारों पर कुठाराघात करते हुए किसानों और श्रमिकों के विरोध में कानून लाया है। केन्द्र सरकार ने शांताकुमार कमेटी द्वारा वर्ष-2015 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी उसके अनुरूप कानून बनाया गया जिस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आपत्ति जताई है।

रविवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने मंत्रिमंडल के कुछ सहयोगियों के साथ कांग्रेस भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि किसानों और श्रमिकों के विरोध में बनाए गए इस कानून को शांताकुमार कमेटी ने वर्ष-2015 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उसके अनुरूप यह कानून बनाया गया। इस पर राज्यों से चर्चा नहीं की गई। केन्द्र सरकार ने राज्यों के अधिकारों पर कुठाराघात करते हुए यह बिल लाया है, इसका हम विरोध करते हैं। केन्द्र ने 3 सौ श्रमिकों वाले कारखानेदार को छंटनी करने की छूट दे दी है। पहले सौ श्रमिकों वाले कारखानों में भी छूट थी। ये राज्यों को विश्वास में लिए बिना पास कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि एक ओर पूरा देश कोरोना वायरस जैसी संकट से जूझ रहा था, वहीं दूसरी ओर मीडिया के माध्यम से देश की निगाहें सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण की ओर थी तब केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाते हुए इसे संसद में पेश करते हुए पास करा लिया। बिल में यह प्रावधान है कि कोई भी किसान कहीं भी अपनी उपज को बेच सकता है, इस पर रोक कब थी? पहले से ही बेचने की छूट रही है। निजी व्यवसायियों को भंडारण की छूट मिल गई है। दलहन-तिलहन के दाम बढ़ेंगे। केन्द्र सरकार निजी मंडियों को लाकर राज्यों के मंडियों को खत्म करना चाहती है। सभी राज्यों में मंडी कानून बने हुए हैं। जिसके जरिए वहां काम करने वाले हमाल और अन्य लोगों को सरंक्षण मिला हुआ है। यह खत्म हो जाएगा। कृषि सुधार बिल में कॉट्रेक्ट फार्मिंग पर जोर है। कॉट्रक्ट फार्मिंग सब्जी और फल उत्पादकों के लिए तो फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अनाज पैदा करने वालों को नुकसान होगा।

बघेल ने कहा कि पीडीएस सिस्टम को खत्म करने की साजिश है। शांताकुमार कमेटी ने यह कहा है कि किसानों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की जानकारी नहीं रहती है। मुख्यमंत्री ने इसको पूरी तरह गलत बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ में 20 लाख पंजीकृत किसान हैं जिनमें से 98 फीसदी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेची है और राजीव न्याय योजना के जरिए अतिरिक्त राशि भी दी गई है। उन्होंने कहा कि पीडीएस सिस्टम में ब्लैक मार्केटिंग का जिक्र है। जबकि छत्तीसगढ़ में 66 लाख राशन कार्डधारी हैं, जिन्हें आधार से लिंक किया गया है।

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