मप्र : इस विवि में 15 पैसे से लेकर 3.50 लाख रुपए कीमत तक की 1.89 लाख किताबें

उज्जैन // विक्रम विश्वविद्यालय का ‘महाराजा जीवाजीराव पुस्तकालय’। यह मध्यप्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी के रूप में पहचान बनाए हुए है। यहां 15 पैसे से लेकर 3.50 लाख रुपए कीमत तक की 1.89 लाख किताबें हैं।
भारत के आजादी की संधि वाली किताब ‘ट्रांसफर ऑफ पॉवर’ समेत कुछ इतनी दुर्लभ किताबें हैं कि इन्हें पढ़ने के लिए देशभर से लोग यहां आते हैं। 
सागर यूनिवर्सिटी के बाद विक्रम यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी मध्यप्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी मानी जाती है। इसकी स्थापना महाराजा जीवाजीराव सिंधिया और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रयास से 1 मार्च 1957 को हुई थी। इसे सेंट्रल लाइब्रेरी भी कहा जाता है। लाइब्रेरी की बैठक क्षमता 400 लोगों की है। यहां हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, मराठी, बंगाली, मालवी, मैथली समेत दर्जनभर भाषाओं की किताबों का अद्भुत संग्रह उपलब्ध है।
बापू पर 15 हजार किताबें : यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन, दर्शन और विचार से जुड़ी 15 हजार से अधिक किताबें और 2145 शोधग्रंथ भी उपलब्ध हैं। भारत के आजादी की संधि आधारित बेहद दुर्लभ किताब ट्रांसफर ऑफ पॉवर भी यहां उपलब्ध हैं, जिसे पढ़ने-देखने के लिए देशभर से लोग आते हैं। लंदन में सन 1947 में प्रकाशित यह वह किताब है जो लॉर्ड माउंटेबेटन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को सौंपी थी। स्वर्ण स्याही से लिखा एक ग्रंथ भी है, जिसकी कीमत 3.50 लाख रुपए बताई गई है। लाइब्रेरी का कुछ हद तक डिजिटलाइजेशन भी किया गया है। बदलते वक्त के साथ विश्वविद्यायल अब इसे पूर्ण रूप से डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की कवायद कर रहा है।
यहीं है मप्र का सबसे बड़ा पांडुलिपि संग्रहालय
उज्जैन में मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा पांडुलिपि संग्रहालय भी है, जिसकी स्थापना सन् 1931 में हुई थी। ये स्थान सिंधिया प्राच्य विद्या शोध प्रतिष्ठान के रूप में ख्यात है। यहां देवनागरी के अलावा शारदा, ग्रंथ, गुरुमुखी, मैथली, मोड़ी आदि लिपि में लिखी 20 हजार से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध है, जो कागज, भोजपत्र पर अंकित है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली ने यहां के 4 हजार ग्रंथों का डिटिजलाइजेशन भी किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here