कश्मीर: पाक में नेता ही नहीं, उर्दू भाषी मीडिया भी बौखलाया ,परोस रहा मनगढ़ंत ख़बरें

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य के दर्जे का ख़त्म किए जाने के भारतीय फ़ैसले से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

 

कराची में आयेजित भारत विरोधी प्रदर्शन
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पांच अगस्त को संसद में इसकी घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि भारत के राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म कर दिया है साथ ही जम्मू-कश्मीर को राज्य की जगह केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है.
इसके अलावा जम्म-कश्मीर से लद्दाख़ को अलग कर उसे भी एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है.
कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान दोनों अपनी-अपनी दावेदारी पेश करते रहे हैं और कश्मीर के ही कारण भारत और पाकिस्तान के बीच जंग भी हो चुकी है.
ज़ाहिर है कश्मीर से जुड़ा कोई भी मुद्दा पाकिस्तानी मीडिया के लिए सबसे बड़ी ख़बर होती है इसीलिए भारत के इस फ़ैसले को पाकिस्तानी उर्दू अख़बारों मे सबसे ज़्यादा जगह मिली.
कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों का दावा
पाकिस्तानी अख़बारों का दावा है कि शुक्रवार (नौ अगस्त) के दिन जुमे की नमाज़ के बाद हज़ारों कश्मीरियों ने कर्फ़्यू को नज़रअंदाज़ करते हुए विरोध प्रदर्शन किया.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार जुमे की नमाज़ के बाद क़रीब 10 हज़ार लोगों ने कर्फ़्यू तोड़ा जिसके बाद सुरक्षाबलों ने गोली चलाई जिसके जवाब में कम से कम तीन लोग मारे गए हैं.
वहीं अख़बार जंग ने लिखा है, “भारत आज़ादी के जज़्बे को दबाने में नाकाम, कश्मीरियों ने कर्फ़्यू तोड़ दिया.”
अख़बार लिखता है कि कश्मीरी युवाओं ने भारतीय सेना की गोलियों को नज़रअंदाज़ करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार की कर्फ़्यू को नकार दिया है.
अख़बार ने अल-जज़ीरा चैनल का हवाला देते हुए लिखा है कि अल-जज़ीरा ने भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सेना के कथित ज़ुल्म को दिखा दिया है.
अख़बार के अनुसार प्रदर्शनकारी अपने हाथों में पाकिस्तानी झंडे लिए हुए थे. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया जिससे कई बच्चे घायल हुए हैं.
अख़बार के अनुसार पैलेट गन से घायल होने वालों में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं. अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार सुरक्षाकर्मियों की गोली से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है.
पाक का दावा, चीन देगा साथ
पाकिस्तान का दावा है कि कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन उसका साथ देगा.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इमरजेंसी में दो दिवसीय चीन यात्रा की. उन्होंने चीन के विदेश मंत्री से मुलाक़ात के बाद कहा कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान का साथ देगा.
अख़बार जंग के अनुसार चीनी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को यक़ीन दिलाया है कि कश्मीर के मामले में भारतीय कार्रवाई एकतरफ़ा और शांति के लिए ख़तरा है.
अख़बार दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई है, “कश्मीर के मुद्दे पर हम पाकिस्तान को इंसाफ़ दिलाएंगे.”
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने लिखा है कि पाकिस्तान ने थार एक्सप्रेस, समझौता एक्सप्रेस, दोस्ती बस को बंद करने का फ़ैसला किया है. अख़बार के अनुसार शुक्रवार को इमरान ख़ाने के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें इन फ़ैसलों की मंज़ूरी मिल गई.
इससे पहले भारत के पांच अगस्त के इस फ़ैसले के ठीक अगले दिन यानी छह अगस्त को ये ख़बर सारे अख़बारों में सुर्ख़ियों में रही.
अख़बार एक्सप्रेस ने सुर्ख़ी लगाई थी, “भारत प्रशासित कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म, हिंदू बस्तियां बसाने की इजाज़त, लद्दाख़ भी अलग.”
अख़बार ज़ंग ने सुर्ख़ी लगाई थी, “भारत ने कश्मीर हड़प कर लिया, विशेष दर्जा, अलग झंडा और अलग संविधान का अधिकार समाप्त.”
अख़बार दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई थी, “मोदी का कश्मीरियों के अधिकार पर डाका, मुसलमानों की बहुमत को अल्पमत में बदलने की साज़िश.”
वहीं अख़बार नवा-ए-वक़्त ने इस पर सुर्ख़ी लगाई थी, “कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म, इसराइली तर्ज़ पर ग़ैर-कश्मीरियों को बसाने की योजना.
नवा-ए-वक़्त ने आगे लिखा है, “मोदी गर्दी के ख़िलाफ़ पाकिस्तान भर में रैलियां, विरोध प्रदर्शन, भारत की विपक्षी पार्टियां भी सड़कों पर, इसे काला दिन क़रार दे दिया.”
सिर्फ़ पहले दिन ही अख़बारों ने कश्मीर की ख़बर नहीं छापी, बल्कि कश्मीर से जुड़ी हर ख़बर पाकिस्तान से छपने वाले हर उर्दू अख़बारों के पहले पन्ने पर प्रमुखता से रोज़ाना छप रही हैं.
पाकिस्तान की केंद्र सरकार के अलावा प्रमुख विपक्षी पार्टियां भी कश्मीर के मामले में भारतीय फ़ैसले की जमकर आलोचना कर रही हैं और प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से भारत को जवाब देने की मांग कर रही हैं.
पाक सरकार की कश्मीर पर चर्चा
सरकार ने इस पर बहस करने के लिए संसद का विशेष संयुक्त सत्र बुलाया था.
अख़बार जंग के अनुसार बहस के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा कि कश्मीर के लिए अपना ख़ून बहा देंगे. नेता प्रतिपक्ष और मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि “केवल निंदा प्रस्ताव न पारित करें बल्कि भारत के हाथ काट डालें.”
अख़बार के अनुसार तमाम विपक्षी पार्टियों ने कहा कि ये पाकिस्तान के लिए ये 1971 से बड़ी दुखद घटना है.
अख़बार जंग के अनुसार विपक्षी पार्टियों ने बहस के दौरान सरकार पर हमला करते हुए कहा कि “क्या फ़लस्तीन में ट्रंप की मध्यस्थता नहीं देखी.”
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने इस मौक़े पर कहा कि भारत के टूटने की प्रक्रिया शुरु हो गई है. ज़रदारी ने कहा कि “ऐसा क़दम उठाने के बाद भारत ख़ुद अस्थिर होगा, भारत में धर्मनिरपेक्षता दफ़्न हो गया है. कश्मीर के अंदर लड़ने वाले कश्मीरियों पर भी फ़ख़्र हैं.”
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि कश्मीर की हैसियत में कोई बदलाव नहीं होनी चाहिए. अख़बार लिखता है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने पाकिस्तान को विश्वास दिलाया है कि “भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर की समस्या का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पारित प्रस्तावों के आधार पर ही होगा.”
वहीं अख़बार दुनिया ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के हवाले से लिखा है कि “भारत पुलवामा-2 जैसा ड्रामा रचा सकता है.”
अख़बार दुनिया के अनुसार क़ुरैशी ने कहा है कि भारत कब तक एक करोड़ चालीख़ लाख कश्मीरियों को बंद रखेगा और काले क़ानून लागू करेगा
                                        (बीबीसी हिंदी न्यूज़.कॉम से साभार ,लेखक इकबाल अहमद,शीर्षक परिवर्तित )

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