जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देना सबसे बड़ी भूल : स्वामी निश्चलानंद

भोपाल। पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि कश्मीर में स्वतंत्र भारत में एक राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देना तत्कालीन शासकों की सबसे बड़ी भूल थी। इसे सुधारने का दावा करने वालों को अब साहस का परिचय देना होगा। फि लहाल जो वातावरण बनाया जा रहा है, उसके पीछे भी चुनाव की राजनीति ही है।

एक दिवसीय प्रवास पर भोपाल आए शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि केंद्र में अब तक की कोई भी सरकार हो, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए कोई भी अनुकूल वातावरण बना पाने में सफ ल नहीं रही है। राजनीतिक दलों द्वारा राम मंदिर निर्माण की सिर्फ बातें की जा रही है, पर अब कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर मामलों पर सब चुप हैं। उन्होंने कहा,कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जिस तरह गुजरात में सोमनाथ मंदिर निर्माण के लिए काम किया, वैसी इच्छाशक्ति अब किसी दल के नेता में नहीं दिखाई देती। शंकराचार्य ने तंज किया कि हम भी हिंदू समाज का अंग हैं पर किसी शंकराचार्य से इस संबंध ने सरकार कोई बात नहीं कर रही है।  एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अपने ही देश में सच कहा जाए तो हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहा है। हिंदू समाज को बौद्ध, जैन व सिख आदि धर्मों में बांट दिया गया है। यह साजिश अभी भी जारी है। कश्मीर में धारा 370 के मामले में उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में एक राज्य कश्मीर को विशेष दर्जा देना सबसे बड़ी भूल थी। अब इस धारा को हटाने की बातें करने वाले कितना साहस कर पाते हैं, आगे देखना होगा। उन्होंने कहा कि गो रक्षकों को तो कई नेताओं ने गुंडा तक कह दिया, तो अब गायों की कितनी रक्षा हो सकेगी विचारणीय विषय है।

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