सेब के बराबर वज़नी दुनिया की सबसे छोटी बच्ची, नाम रखा ‘सेबी ‘

अमरीका के एक अस्पताल में 245 ग्राम की बच्ची ने जन्म लिया है जिसे दुनिया की सबसे छोटे साइज़ की बच्ची कहा जा रहा है.
बच्ची का नाम सेबी रखा गया है. जन्म के समय बच्ची का वज़न एक बड़े साइज़ के सेब के बराबर था. दिसम्बर 2018 में सेबी ने 23 सप्ताह और तीन दिन में ही जन्म ले लिया था.
बच्ची के ज़िंदा रहने की उम्मीद बहुत कम थी इसलिए बच्ची को कैलिफोर्निया में सैन डिएगो के शार्प मैरी बर्च अस्पताल में नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट में रखा गया.

डॉक्टर ने सेबी के माता-पिता को बता दिया था कि ज़िंदा रहने के लिए उसके पास कुछ ही घंटे हैं.
लेकिन पांच महीने तक कड़ी निगरानी में रखने के बाद सेबी ने सभी को ग़लत साबित कर दिया और अब उसे स्वस्थ और ढ़ाई किलो वज़न के साथ डिस्चार्ज कर दिया गया है.
जीवन के लिए लड़ रही नवजात सेबी की देखभाल करने वाली नर्स ने बताया कि इस महीने उस बच्ची की अस्पताल से छुट्टी मिलना एक ‘जादू’ की तरह था.
द टिनिएस्ट बेबी रजिस्ट्री का कहना है कि समय से पहले जन्म लेने वाली सेबी को दुनिया की सबसे छोटी नवजात मान रहे हैं.

आयवा यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित रजिस्ट्री के अनुसार, इससे पहले 2015 में ये रिकोर्ड जर्मनी के एक नवजात के नाम था, जिसका वज़न 252 ग्राम था.
इस साल की शुरुआत में जापान में एक बच्चे का जन्म के समय वज़न 268 ग्राम था. माना जा रहा था कि वह समय से पहले जन्म लेने वाला सबसे छोटा लड़का है.
प्री-एक्लेमप्सिया के पता चलने के बाद सेबी की मां ने डिलीवरी के तय समय से तीन महीने पहले ही बच्ची को जन्म दे दिया. प्री-एक्लेमप्सिया गर्भावस्था की एक स्थिति है जिसमें लगभग 20 सप्ताह बाद रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिसके कारण बच्चे को ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते और ऐसे में मां और बच्चे दोनों को ख़तरा हो सकता है.
अस्पताल द्वारा जारी एक वीडियो में माँ ने इस जन्म को ‘अपने जीवन का सबसे डरावना दिन’ बताया.
अपना नाम न बताने की शर्त पर मां ने कहा, ”मैं कहती रही की वो जिंदा नहीं बचेगी. मैं अभी 23 सप्ताह की (गर्भवती) ही हुई हूं.”
अस्पताल ने बताया कि उसका जन्म समय से बहुत पहले हो गया था, जिसे डॉक्टर ने ‘माइक्रो प्रीमी’ नाम से बुलाया- एक ऐसा बच्चा जो 28 सप्ताह पहले जन्म ले. आमतौर पर बच्चे 42 सप्ताह में जन्म लेते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि वो इतनी छोटी थी कि वो देखभाल रहने वाले स्टाफ़ के हाथों की हथेली में आ सकती थी.
डॉक्टरों का मानना ​​है कि उसेक जिंदा रहने का कारण ये भी है कि उसे जन्म के बाद कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई.

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