बलात्कारी नारायण साईं को सींखचों के पीछे पहुंचाने में काफी पसीना बहाना पड़ा पुलिस को

आध्यात्मिक गुरु आसाराम के बेटे नारायण साईं को बलात्कार के एक मामले में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई
आध्यात्मिक गुरु आसाराम के बेटे नारायण साईं को बलात्कार के एक मामले में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
आध्यात्मिक गुरु आसाराम के बेटे नारायण साईं को बलात्कार के एक मामले में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई
गुजरात के सूरत की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को सज़ा का ऐलान किया. नारायण साईं पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
इसके अलावा साईं के करीबी सहयोगियों- गंगा, जमुना और रसोइये हनुमान को दस-दस साल की सज़ा सुनाई गई है.
नारायण साईं के ड्राइवर रमेश मल्होत्रा को छह महीने क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
अदालत ने पीड़िता को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.
इससे पहले, अदालत ने 26 अप्रैल को साईं समेत पांच लोगों को इस मामले में दोषी क़रार दिया था.
सूरत की दो बहनों ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं पर लगातार बलात्कार करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.
छोटी बहन ने नारायण साईं पर 2002 से 2005 के बीच बलात्कार का मामला दर्ज कराया.
उस महिला के मुताबिक, आसाराम के सूरत के आश्रम में नारायण साईं ने बलात्कार किया था.
बड़ी बहन ने शिकायत की थी कि आसाराम ने उसका 1997 से 2006 के बीच अपने अहमदाबाद आश्रम में लगातार बलात्कार किया.
सबूत इकट्ठा करना चुनौतीपूर्ण था’
एसीपी रियाज़ मुंशी
इस मामले में एसीपी रियाज़ मुंशी ने नारायण साईं के ख़िलाफ़ सबूत इकट्ठा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
नारायण साईं का मामला सबसे पहले सीआईडी के पास गया उसके बाद रियाज़ मुंशी को ये काम सौंपा गया जो उस समय सीबीआई में काम कर रहे थे.
नारायण साईं ने उनके ख़िलाफ़ शिकायत तक की थी. शिकायत दर्ज़ कराने के बाद नारायण साईं फ़रार हो गए थे.
रियाज़ कहते हैं, “जब मैं पहली बार पीड़िता से मिला तो मैंने उसकी आंखों में सच्चाई देखी.”
आसाराम के बेटे हैं नारायण साईं
वो बताते हैं, “हालांकि सबसे बड़ी समस्या ये थी कि शिकायत घटना के आठ साल बाद की गई थी. पीड़िता शादीशुदा थी, हमारे पास कोई फ़ॉरेंसिक सबूत भी नहीं था. यहां तक कि कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था.”

 

आसाराम के बेटे हैं नारायण साईं
हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती सबूत इकट्ठा करना था. सबसे पहले हमने 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने महिला का बयान कराया और फिर आसाराम के आश्रम की तलाशी का वारंट हासिल किया.”
लेकिन आसाराम के आश्रम की तलाशी लेना आसान नहीं था.
रियाज़ मुंशी के मुताबिक, ‘सर्च वारंट के बावजूद, हमारे लिए आश्रम में प्रवेश पाना आसान नहीं था. किसी को भी आश्रम में प्रवेश करने की इजाज़त नहीं दी गई.’
वो कहते हैं, “हम पीड़िता और उसके भाई के साथ सूरत में जहांगीरपुर इलाके में स्थित आसाराम के आश्रम पहुंचे.”
“इस पूरे तलाशी अभियान की रिकॉर्डिंग की गई. महिला ने जो बताया था, उसके अनुसार आश्रम में कुछ चीजें थीं.”
“हमें नारायण साईं के कॉटेज तक जाना था. इस कॉटेज में वहां के अन्य संन्यासियों को भी जाने की इजाज़त नहीं थी.”

मुंशी बताते हैं, “जब हम नारायण साईं के कॉटेज पहुंचे, वो बाहर से लॉक था. आख़िरकार हम कॉटेज में प्रवेश पाने में सफल रहे.”
गुमनाम महिलाओं ने की मदद
रियाज़ कहते हैं, “हमने वहां वैसा ही सीन देखा, जैसा पीड़िता ने हमें पहले बताया था.”
वो कहते हैं, “हमारे साथ फॉरेंसिक विभाग की टीम थी, उन्होंने पूरे कॉटेज की जांच पड़ताल की कि यहां क्या बदलाव हुए हैं.”
“2006 में सूरत में आई बाढ़ के बाद क्या कुछ बदला है, क्या दीवारें पुरानी हैं या उनकी मरम्मत की गई है. इस तरह से सबूत इकट्ठा किए गए.”

रियाज़ के अनुसार, “आश्रम में तलाशी के बाद हमने परिस्थितिजन्य सबूतों को इकट्ठा करने की शुरुआत की. नारायण साईं के सहयोगी ने हमें ग़लत जानकारी दी थी.”
वो कहते हैं, “पीड़िता ने हमें नारायण साईं का नंबर दिया जिससे हमारा काम आसान हो गया.”
“इस मोबाइल नंबर के आधार पर हमने नारायण साईं के लोकेशन को पता करने की कोशिश की, जहां से हमें लीड मिलनी शुरू हो गई.”
“हमने नारायण साईं और उनके सहयोगियों की तस्वीरें हवाईअड्डों पर दे दीं ताकि वो देश छोड़कर बाहर न जा सके. “
“इस मामले में हमें अन्य महिलाओं से भी मदद मिली, जिन्होंने नाम न देने की शर्त पर परिस्थितिजन्य साक्ष्य मुहैया कराए.”
“पीड़िता ने खुद भी छानबीन की थी और कुछ सबूत इकट्ठा किए थे.”
राजनेताओं से भी मिली धमकियां
रियाज़ कहते हैं, “इस दौरान नारायण साईं ने आश्रम का एक चेक पीड़िता को दिए थे जिसकी एंट्री बैंक खाते में दर्ज थी, इसने भी सबूत का काम किया. “
2013 में केस दर्ज होने के बाद नारायण साईं फ़रार हो गया, उसके बाद सभी आश्रमों में उसकी तलाशी ली गई.
हालांकि आखिरकार नारायण साईं अपने सहयोगियों के साथ हरियाणा में गिरफ़्तार कर लिया गया, जहां से उसे सूरत लाया गया.
रियाज़ बताते हैं कि सबूत इकट्ठा करने के दौरान उन्हें बड़े बड़े राजनीतिज्ञों की ओर से धमकियां भी मिलीं.
वो कहते हैं, “नारायण साईं का कुछ लोगों के साथ संपत्ति को लेकर झगड़ा भी चल रहा था. इन लोगों ने भी सबूत इकट्ठा करने में हमारी मदद की.”
“जिन लोगों ने हमारी मदद की, उन्हें रिश्वत देने की भी कोशिश की गई लेकिन आख़िरकार हम पक्के सबूत इकट्ठा करने में कामयाब रहे और इसी की वजह से नारायण साईं को सज़ा मिल सकी.”

(बीबीसी हिंदी न्यूज़.कॉम से साभार )

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