जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया  मसूद अज़हर को ‘आतंकवादी’ मान UN ने लगाया प्रतिबंध, मोदी बोले-बड़ी सफलता

संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तानी चरमपंथी और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अज़हर को ‘आतंकवादी’ घोषित किया.
भारत ने अमरीका, ब्रिटेन समेत सुरक्षा परिषद के स्थाई और अस्थाई सदस्यों का धन्यवाद किया.
संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तानी चरमपंथी और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अज़हर को ‘आतंकवादी’ घोषित किया.
पाकिस्तान ने प्रतिबंध समिति के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वह आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करता रहेगा.
चीन ने कहा कि वह पाकिस्तान का आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाइयों का समर्थन करता है.
मौलान मसूद अज़हर को ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकी’ घोषित किए जाने की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट करके की.
उन्होंने लिखा है कि इस काम में ‘बड़े-छोटे (देशों), सभी का साथ मिला. संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में मसूद अज़हर को आतंकी घोषित कर दिया गया है. समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद.’चीन का समर्थन न मिलने की वजह से कई बार संयुक्त राष्ट्र में यह प्रस्ताव ख़ारिज़ हो चुका था. जबकि फ़्रांस, अमरीका और ब्रिटेन जैसे देश इस प्रस्ताव के पक्ष में थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की बड़ी सफलता बताया है.
मोदी ने एक रैली में कहा, “मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित करने पर आखिरकार विश्व में सहमति बनी, ये संतोष का विषय है. देर आए दुरुस्त आए. आतंकवाद के ख़िलाफ संघर्ष में और आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए लंबे समय से भारत जो प्रयास कर रहा था, ये उसकी बहुत बड़ी सफलता है.”
मोदी ने आगे कहा, “मैं डंके की चोट पे ये कहना चाहता हूं कि ये तो सिर्फ शुरुआत है. आगे आगे देखिए होता क्या है?”
विपक्ष पर भी निशाना साधा.
उन्होंने कहा, “मैं देश को याद दिलाना चाहता हूं कि जब ये काम चल रहा था तब नामदार ट्वीट कर करके बड़ी खुशी मनाते थे. एक पूरा वर्ग बहुत खुश था और मोदी की मजाक उड़ाते थे. आज इतने दिनों से मजाक उड़ाने वालों को मैं कहना चाहता हूं कि ये सिर्फ मोदी की सफलता नहीं है. ये पूरे हिंदुस्तान की सफलता है.”
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र में मौलाना मसूद अज़हर को ‘वैश्विक आतंकी’ घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं.
पाकिस्तान ने कहा है कि यह समिति सर्वसम्मति से फ़ैसला लेती है और जब कोई समस्या होती है तो किसी फ़ैसले पर तकनीकी रोक लगा दी जाती है और मौलाना मसूद अज़हर के मामले में यह होता आया था.
पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि इस मामले में राजनीतिक कोशिशें की गई हैं और समिति की गोपनीय कार्रवाइयों को ख़ासतौर पर भारतीय मीडिया में लीक किया गया. पाकिस्तान ने कहा कि वह मानता है आतंकवाद दुनिया के लिए ख़तरा है जिसमें भारत प्रशासित कश्मीर में लोगों के ख़िलाफ़ राज्य प्रायोजित आतंकवाद भी है.
इसके साथ ही पाकिस्तान ने कहा है कि भारतीय मीडिया इसको अपनी ‘जीत’ बताएगा जो बिलकुल झूठ और निराधार है. हालांकि, पाकिस्तान ने आगे कहा है कि वह मानता है कि उसकी ज़मीन से आतंक फैलाने वाले संगठन के लिए उसके यहां कोई जगह नहीं है और आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए उनका संकल्प है.
चीन ने क्या कहा
मौलान मसूद अज़हर को ‘वैश्विक आतंकी’ की सूची में शामिल करने पर चीन रोक लगाता रहा है लेकिन इस बार उसने इस पर आपत्ति नहीं जताई है.
चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि संबंधित देशों ने जब इससे जुड़ी संशोधित सामग्री को दोबारा पेश किया तो बारीकी से निरीक्षण के बाद इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई.
चीन ने कहा है, “इस मुद्दे का निपटारा फिर से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी सहयोग को दर्शाता है, हमें प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र के निकायों के नियमों और प्रक्रियाओं को बरकरार रखना होगा, परस्पर सम्मान के सिद्धांत का पालन करना होगा, बातचीत के ज़रिए आपसी मतभेदों को सुलझाते हुए आम सहमति बनानी होगी और तकनीकी मुद्दों के राजनीतिकरण को रोकना होगा.”
इसके अलावा चीन ने अपने मित्र देश पाकिस्तान का एक बार फिर समर्थन किया है. चीन का कहना है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में बड़ा योगदान दिया है जिसको अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मान्यता देनी चाहिए.
साथ ही चीन ने कहा है कि आतंकवाद और चरमपंथ ताक़तों से लड़ने की पाकिस्तान की कोशिशों को वह समर्थन देता रहेगा.
संयुक्त राष्ट्र ने क्यों लगाया प्रतिबंध
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बयान जारी किया है जिसमें उसने बताया है कि मौलाना मसूद अज़हर अल-क़ायदा से जुड़े रहे हैं जिसमें उन्होंने योजना बनाने, पैसा इकट्ठा करने, हथियार और अन्य साज़ो-सामान को बेचने या उन्हें स्थानांतरित करने का काम किया है.                        
बयान में कहा गया है कि मसूद अज़हर ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की थी और अल-क़ायदा, ओसामा बिन लादेन और तालिबान से जुड़े होने के कारण जैश-ए-मोहम्मद पर 17 अक्तूबर 2001 को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंध लगा दिया था.
साथ ही मसूद अज़हर ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना से उसको आर्थिक रूप से मदद दी थी.
वहीं, समाचार एजेंसी एएनआई ने सैयद अकबरुद्दीन का एक वीडियो भी ट्वीट किया जिसमें वह इंडोनेशिया के संयुक्त राष्ट्र में स्थाई राजदूत को धन्यवाद दे रहे हैं.
उन्होंने कहा, “इंडोनेशिया के स्थाई राजदूत ने हमें सूचित किया कि मसूद अज़हर को विश्व में आतंक फैलाने वाले शख़्स के तौर पर मान्यता दे दी है. यह हमारे लिए महत्वपूर्ण परिणाम है क्योंकि भारत कई सालों से इसकी कोशिश करता रहा है.”
“भारत ने पहली बार 2009 में इसकी कोशिश की थी लेकिन हमने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखीं और आज इसे पा लिया है. इस कोशिश में साथ देने के लिए अमरीका, ब्रिटेन समेत उन सारे देशों का धन्यवाद जो परिषद के अंदर और बाहर हैं. साथ ही साथ यह दिन उन लोगों के लिए बहुत ख़ास है जो आतंकवाद के लिए ज़ीरो टॉलरेंस चाहते हैं.”
इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एएनआई से बातचीत में कहा है कि मसूद अज़हर को ‘वैश्विक आतंकी’ घोषित किए जाने का मक़सद पूरा हो पाया इसको लेकर वह ख़ुश हैं.
मसूद अज़हर के चरमपंथी समूह को भारत कई हमलों के लिए ज़िम्मेदार मानता है.
             
भारत सरकार बीते कई साल से मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के लिए अलग-अलग मोर्चों पर कूटनीति का प्रयोग करती रही है.
लेकिन हाल ही में पुलवामा हमले के बाद इन कोशिशों ने फिर ज़ोर पकड़ा था.
भारत मानता है कि पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले के पीछे मसूद अज़हर के संगठन का ही हाथ था. इस हमले में भारतीय सुरक्षा बल के कम से कम 40 जवान मारे गए थे.
हाल ही में भारत में मसूद अज़हर को आतंकवादी घोषित करने की कोशिशों को फिर बल मिला था, जब ब्रिटेन के उच्चायुक्त डोमिनिक एस्क्वॉथ ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आंतकियों की सूची में मसूद अज़हर को शामिल किया जाएगा इसको लेकर वह ‘आशावादी’ हैं.
इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी भारत के पक्ष में बयान दिया था. मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पालाडिनो ने कहा था, “इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने में अमरीका और चीन के साझे हित हैं और अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं किया जाता है तो ये इस क्षेत्र की शांति के ख़िलाफ़ होगा.”
संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधित किए गए किसी शख़्स को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कोई भी सदस्य देश अपने यहां शरण नहीं दे सकता. साथ ही, ऐसे व्यक्ति के आर्थिक लेन-देन पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

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