पाक का नया पैंतरा, भारतीय पत्रकारों को बालाकोट ले जाने को है तैयार

गफूर का कहना है कि भारत लगातार झूठ बोल रहा है और पाकिस्तान उसका जवाब नहीं दे रहा है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सेना ने सोमवार को एक बार फिर झूठ बोला कि भारत की तरफ से बालाकोट में फरवरी में की गई एयर स्ट्राइक में उसे कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था। इतना ही नहीं, उस हमले में उसके किसी भी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। रावलपिंडी में सेना मुख्यालय को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने भारतीय पत्रकारों को बालाकोट ले जाने की पेशकश की है।

 

गफूर का कहना है कि भारत लगातार झूठ बोल रहा है और पाकिस्तान उसका जवाब नहीं दे रहा है।
बालाकोट एयर स्ट्राइक के दो महीने के बाद पाकिस्तना ने यह नया दांव फेंका है। हालांकि, वह इससे पहले वह ऐसा करने से बचता रहा है। हमले के डेढ़ महीने के बाद वह विदेशी मीडिया को घटनास्थल ले गया था, लेकिन जैश-ए-मोहम्मद के उस ट्रेनिंग कैंप के अंदर नहीं ले गया, जहां भारतीय वायुसेना ने कार्रवाई की थी।
गफूर का कहना है कि भारत लगातार झूठ बोल रहा है और पाकिस्तान उसका जवाब नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘पिछले दो महीनों से भारत ने बहुत सारे झूठ बोले हैं। एक जिम्मेदार देश होने के नाते हमने उनके झूठ का जवाब नहीं दिया।’ गफूर का कहना है कि पुलवामा हमले में पाकिस्तान का कोई हाथ नहीं है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने साक्ष्य के साथ-साथ बातचीत के आधार पर जांच का आह्वान किया था।
बताते चलें कि 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने हमला किया था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 26 फरवरी को खैबर पख्तूख्वां प्रांत के बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविरों को निशाना बनाया था। इसके बाद पाकिस्तान ने 27 फरवरी को नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अपना लड़ाकू विमान भेजा था।
भारतीय वायुसेना के जांबाज विंग कमांडर अभिनंदन ने न सिर्फ पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ दिया था, बल्कि एक एफ-16 विमान को भी मार गिराया था। हालांकि, इस कार्रवाई में विंग कमांडर का मिग-21 बायसन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और पाकिस्तानी सेना ने उन्हें बंदी बना लिया था। मगर, तीन दिनों के अंदर ही उन्हें रिहा करना पड़ा था।
वहीं, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता गफूर ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए क्योंकि 1971 के युद्ध के बाद से जमीन पर स्थिति बदल गई है, जिसमें पूर्वी पाकिस्तान से बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। उन्होंने कहा कि यह 1971 की बात नहीं है। यह वह फोर्स नहीं और और वैसे हालात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीरियों के समर्थन देने के लिए पाकिस्तान निरंतर संघर्ष शामिल है।
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को मारने और उनकी फैसिलिटीज को खत्म करने के लिए “काइनेटिक ऑपरेशन” किया गया था। आज हम विश्वास और सबूत के साथ कह सकते हैं कि पाकिस्तान में किसी भी तरह का संगठित आतंकवादी ढांचा मौजूद नहीं है। गफूर ने कहा कि पाकिस्तान की योजना है कि 30,000 से अधिक मदरसों को राज्य नियंत्रण में लाया जाए, जो उन्हें मुख्यधारा की ओर ले जाए। वहां इस्लामी शिक्षा प्रदान की जाती रहेगी, लेकिन कोई घृणास्पद भाषण नहीं होगा।

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