छोटे भाई पर क्यों छलका मुकेश अंबानी का प्यार ?

मुंबई। 10 साल पहले अनिल अंबानी ने अपने भाई मुकेश अंबानी पर 10 हज़ार करोड़ की मानहानि का मुक़दमा दर्ज कराया था.
मुकेश अंबानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने अनिल अंबानी पर अलग होने से पहले अपने ख़िलाफ़ लॉबीइस्ट और जासूस की एक टीम लगाने का आरोप लगाया था. इसी इंटरव्यू के बाद अनिल अंबानी ने मानहानि का मुक़दमा दर्ज कराया था.
इस हफ़्ते अनिल अंबानी का बिल्कुल अलग बयान आया. अनिल अंबानी ने कहा, ”मेरे आदरणीय भैया और भाभी को दिल से शुक्रिया और आभार. मुश्किल घड़ी में मेरे साथ आप खड़े रहे.”
मुकेश अंबानी ने अपने भाई की देनदारी चुकता कर उन्हें जेल जाने से बचाया है. पिता की मौत के बाद दोनों भाइयों में कड़वाहट की सारी हदें सार्वजनिक हुईं और धीरूभाई अंबानी का कारोबारी साम्राज्य रिलायंस का सिक्का दो हिस्सों में बँट गया था.

स्वीडन की कंपनी एरिक्सन की 7.7 करोड़ डॉलर की देनदारी को अनिल अंबानी को 20 मार्च तक चुकता करना था. सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा था कि अगर वो तय समय सीमा के भीतर चुकता नहीं करेंगे तो तीन महीने की जेल होगी.
अनिल ने पिछले साल ही ये देनदारी चुकाने का अदालत में वादा किया था लेकिन वादा तोड़ने के कारण कोर्ट ने अवमानना का दोषी क़रार दिया था. अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम इस रक़म का इंतज़ाम करने में नाकाम रही और मुकेश अंबानी तारणहार बने.
सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई समय सीमा से दो दिन पहले एरिक्सन ने कहा कि उसकी देनदारी आरकॉम ने ब्याज़ के साथ दे दी है. इसके बाद क़यास लगने लगे कि आरकॉम ने ये पैसे कहां से लाए.
देर रात इसका जवाब भी मिल गया जब अनिल अंबानी ख़ुद ही सामने आए और उन्होंने कहा कि अतीत की कड़वाहट भूलने के लिए वो अपने भाई के आभारी हैं.

दोनों भाइयों का अतीत बहुत ही नाटकीय रहा है. ऐसा तब है जब भारत के कारोबारी संसार में परिवारों का दबदबा है. धीरूभाई अंबानी की मौत के तीन साल बाद रिलायंस ग्रुप दोनों भाइयों के बीच बँट गया था.

मुकेश के हिस्से में पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़ा कारोबार आया तो अनिल के हिस्से में संभावनाओं से भरे सेक्टर टेलिकॉम, ऊर्जा और फ़ाइनैंस आए.
क्या दोनों अंबानी भाइयों में अब सब कुछ ठीक हो गया
दोनों भाइयों के बीच तनाव की स्थिति अलग होने से पहले ही बन गई थी लेकिन इसका उभार अलग होने के बाद हुआ. अनिल अंबानी ने मुकेश पर उनके नए पावर प्लांट में डील के हिसाब से गैस की आपूर्ति नहीं करने का आरोप लगाया था.
मुकेश अंबानी ने दक्षिण अफ़्रीका की टेलिकॉम कंपनी एमटीएन के अनिल अंबानी की टेलिकॉम कंपनी आरकॉम में प्रस्तावित विलय को रोक दिया था.

हाल के वर्षों में दोनों भाइयों के अतीत वाली दुश्मनी का असर कम होता दिखा. ऐसे में दोनों के बीच श्रेष्ठता को लेकर प्रतिस्पर्धा का भी अंत हो गया. आज की तारीख़ में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट वैल्यू 124 अरब डॉलर से पार चला गया.
मुकेश की नई टेलिकॉम कंपनी जियो को लेकर भी निवेशकों में भारी उत्साह है. दूसरी तरफ़ अनिल अंबानी की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट वैल्यू घटकर दो अरब डॉलर तक पहुंच गया है.
हालात ये हो गई कि अनिल एरिक्सन को 6.7 करोड़ डॉलर की देनदारी की रक़म का इंतज़ाम तक नहीं कर पाए. इसके उलट अनिल अंबानी 2008 में फ़ोर्ब्स की रैंकिंग में 42 अरब डॉलर के साथ दुनिया के आठवें सबसे अमीर शख़्स थे.
अभी मुकेश अंबानी 50 अरब डॉलर की निजी संपत्ति के साथ एशिया के सबसे अमीर शख़्स हैं. ऐसे में मुकेश अंबानी के लिए भाई का क़र्ज़ चुकाना कोई बड़ा सौदा नहीं था. इस मामले में मुकेश अंबानी बिल्कुल चुप रहे. ज़ाहिर है अगर वो कुछ बोलते तो कई तरह के क़यास लगाए जाते.
कुछ लोगों का मानना है कि इसमें मुकेश और अनिल की 84 साल की मां कोकिलाबेन का हाथ है. कोकिलाबेन ने ही 2005 में दोनों भाइयों के बीच रिलायंस ग्रुप का बँटवारा किया था.
बँटवारे के वक़्त यह बात तय हुई थी कि दोनों भाई रिलायंस शब्द का इस्तेमाल करेंगे लेकिन दोनों के कारोबार पूरी तरह से अलग हैं. कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर अनिल अंबानी जेल जाते तो रिलायंस का ब्रैंड ख़राब होता.
दिसंबर 2017 में मुकेश अंबानी की जियो ने आरकॉम की संपत्तियों को ख़रीदने का समझौता किया था. इससे मुकेश अंबानी की जियो को स्पेक्ट्रम इन्फ़्रास्ट्रक्चर जल्दी हासिल करने में भी मदद मिली.
2018 में आरकॉम के शेयर में 60 फ़ीसदी की गिरावट आई थी और आख़िरकार टेलिकॉम सेक्टर से बोरिया-बिस्तर बांधने पर मजबूर हुए.

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