चुनाव:  मप्र भाजपा में खुलकर सामने आया अंतर्विरोध, नारेबाजी  

भोपाल,(जनप्रचार.कॉम)//। प्रदेश भाजपा में मौजूदा कुछ सांसदों को लेकर विरोध अब खुलकर सामने आ रहा है। इसके चलते पार्टी भी दस से अधिक सांसदों के परफार्मेंस को कमजोर मानते हुए नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर रही है। 
भाजपा कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते राजगढ़ से आए कार्यकर्ता।
मंगलवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित चुनाव प्रबंध समिति की बैठक के दौरान राजगढ़ से आए कार्यकर्ताओं ने वहां के  सांसद रोडमल नागर के  खिलाफ नारेबाजी की। यह नागर को दोबारा टिकट न दिए जाने की मांग कर रहे थे। इधर, केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक का टिकट कटवाने के लिए भी 
 स्थानीय भाजपा नेता  एकजुट हो गए हैं। टीकमगढ़ में खटीक के खिलाफ  सागर वापस जाओ को नारे लगाए जा रहे हैं। पिछले दिनों टीकमगढ़ में एक फ ार्म हाउस पर पूर्व मंत्री ललिता यादव, विधायक हरिशंकर खटीक, पूर्व विधायक  पुष्पेन्द्र पाठक, पूर्व विधायक आरडी प्रजापति समेत अन्य नेताओं ने खटीक के खिलाफ रणनीति बनाई। इस बात की जानकारी भी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय को मिल गई है। 
 दरअसल, टीकमगढ़ से जतारा विधायक हरिशंकर खटीक टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। वह खुद को टिकट नहीं मिलने पर पत्नी विंदेश्वरी को टिकट दिए जाने क ी भी मांग कर रहे हैं।  वहीं खजुराहों से ललिता यादव टिकट की मांग कर रही हैं। इसको लेकर उन्होंने पार्टी हाईकमान से भी गुहार लगा चुकी हंै।  टीकमगढ़ लोकसभा में छतरपुर जिले की तीन विधानसभा सीट आती हैं। वहीं बालाघाट में अपनी बेटी के लिए टिकट की मांग को लेेकर अड़े पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन का भी विरोध हो रहा है। तो खंडवा में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान व पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस के समर्थक आमने-सामने हैं। 
  विदिशा सीट को लेकर भी विरोध
इधर,किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश महामंत्री रवीश चौहान ने भी मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने विदिशा से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी साधना सिंह की दावेदारी पर कड़ा ऐतराज जताया। वहीं दमोह सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव ने कहा,कि उनकी दावेदारी से पार्टी में वंशवाद बढऩे के आरोप लगते हैं तो वह अपनी दावेदारी वापस लेने को राजी हैं।
भिंड में मौजूदा सांसद डॉ.भागीरथ प्रसाद को भी स्थानीय नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है तो धार में सविता ठाकुर व उज्जैन में संासद चिंतामणि मालवीय की भी यही स्थिति है। उक्त हालातों के चलते ही मंगलवार को संपन्न चुनाव प्रबंध समिति की बैठक महज औपचारिक बन कर रह गई। उम्मीदवारों को लेकर सर्वसम्मति नहीं बन पाने से सर्वे व रायशुमारी के आधार पर पैनल तैयार कर निर्णय केंद्रीय नेतृत्व पर छोडऩा पड़ा। 

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