झाबुआ के बागी नेता जेवियर मेड़ा की पार्टी में वापसी से भूरिया व कांग्रेस को राहत

 भोपाल (janprachar.com)
 विधानसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए प्रदेश में दोनों ही प्रमुख दल अपने बागियों व असंतुष्टों का  मनाने व उनकी घर वापसी में जुट गए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस को गुरुवार को एक बड़ी सफलता मिली जब झाबुआ से बागी हुए उसके पूर्व विधायक जेवियर मेड़ा ने पार्टी में वापसी की। मेड़ा ने पिछला विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा था इसके चलते मौजूदा सांसद कांतिलाल भूरिया के पुत्र व कांग्रेस उम्मीदवार विक्रांत भूरिया को हार का सामना करना पड़ा। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांतिलाल भूरिया के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया था और परिवारवाद, भू-माफिया जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद पाटीज़् ने उन्हें निष्काषित कर दिया था। जेवियर ने लोकसभा चुनाव लडऩे का भी ऐलान किया था और चुनाव को लेकर वह सक्रिय हो गए थे। मेड़ा के  इन तीखे तेवरों को देखते हुए सांसद भूरिया को भी अपनी सीट खतरे में नजर आ रही थी। पार्टी को भी पता था कि जेवियर के रहते इस सीट पर इस बार भूरिया की  जीत मुश्किल है। इसके चलते ही मेड़ा का मनाने की कवायद तेज हुई और अंतत: पार्टी को इसमें सफलता मिली। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कल ही पार्टी नेताओं को निर्देशित किया था कि बागियों को हर हाल में मनाया जाए। 
 अब मैं कांग्रेस के साथ: मेड़ा
जेवियर मेड़ा ने गुुरुवार को खुद इस बात का ऐलान किया है कि वे अब कांग्रेस के साथ हैं और लोकसभा चुनाव में पार्टी को जिताने के लिए काम करेंगे। दरअसल, दिल्ली में आलाकमान के साथ हुई बैठक के बाद ही जेवियर मेड़ा ने यह ऐलान किया। मेड़ की घर वापसी से रतलाम-झाबुआ सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ दमदार प्रत्याशी की तलाश में जुटे प्रतिद्वंदी दल को भी एक बार फिर नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। 
       बागियों के कारण हुआ  नुकसान
एक दिन पहले ही लोकसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में कमलनाथ ने सभी पदाधिकारियों को जी जान से जुटने और हर हाल में विधानसभा चुनाव के दौरान मुश्किलें बढ़ाने वाले बागियों को मनाने को कहा था। कमलनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा था कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 150 सीटें मिलने की पूरी उम्मीद थी। किंतु पार्टी से 
टिकट न मिलने से बागी होकर चुनाव लड़े प्रत्याशियों ने कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया जिससे चुनाव नतीजों में कांग्रेस 114 सीटों पर सिमट कर रह गई। पार्टी के सर्वे में यह बात सामने आई कि 
उसे बागियों की वजह से करीब 40 सीटों पर नुकसान हुआ और जिससे पार्टी के प्रत्याशी जीत नहीं पाए। लोकसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए विधानसभा चुनाव बागी होकर लड़े लोगों को मनाएं। बसपा, सपा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी या अन्य कांग्रेस की विचारधारा से मेलजोल रखने वाले लोगों को पार्टी में शामिल कराएं। इस बार कोई लापरवाही नही होनी चाहिए। 

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