आर्थिक संकट में मप्र सरकार : वित्त विभाग ने विभागों से कहा – बजट की बकाया रकम वापस करो

भोपाल। आर्थिक संकट से गुजर रही राज्य सरकार का प्रबंध गड़बड़ाता जा रहा है। वित्त विभाग ने वित्तीय प्रबंधन के लिए नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें सभी विभागों से कहा गया है कि योजनाओं में जो राशि खर्च नहीं हुई है, उसे तत्काल राज्य सरकार के खजाने में जमा किया जाए। विभिन्न् सरकारी उपक्रमों से भी सरकार के खजाने में राशि जमा करने को कहा गया है।
वित्तीय प्रबंधन के लिए सरकार ने सभी विभागों के लिए जारी किए दिशा-निर्देश
वित्त विभाग ने कहा है कि विभागीय अधिकारियों को व्यक्तिगत जमा खाता खोलने की अनुमति समय-समय पर दी गई है। इस खाते में विभिन्न् योजनाओं की राशि रखी हुई है। योजना पूरी होने या चालू नहीं होने की स्थिति में राशि सरकार की संचित निधि में जमा करा देना चाहिए, लेकिन यह देखने में आया है कि कई विभागों ने राशि जमा नहीं कराई है।
इन खातों में रखी राशि को सरकार की संचित निधि में जमा कर तत्काल यह खाते बंद कर दिए जाएं। 28 मार्च को ऐसे खाते कोषालय स्तर से बंद कर दिए जाएंगे।
इसके साथ ही जिन विभागों ने विभागाध्यक्ष स्तर पर चल रहे बैंक खातों के लिए वित्त विभाग से अनुमति प्राप्त नहीं की है, वे खाते भी बंद किए जाएंगे। इनका पैसा राज्य सरकार के खजाने में जमा किया जाए। जिन खातों के लिए अनुमति ली जा चुकी है, उनमें जमा पैसा भी संचित निधि में जमा किया जाए। निगम-मंडल, विश्वविद्यालय, आयोग यदि अपने स्रोत से प्राप्त राशि बैंक खातों में रखते हैं तो उन्हें यह खाता बंद करने की जरूरत नहीं है।
लाभांश भी मांगा
वित्त विभाग ने कहा है कि राज्य सरकार जनकल्याण और विकास के लिए कार्य करती है। ऐसे संस्थान, जहां राज्य सरकार की अंशपूंजी है और व्यावसायिक कार्य करते हैं, वे सभी अपना लाभांश भी सरकार के खाते में जमा करें। कल्याणकारी कार्यों के लिए वित्तीय उपलब्धता बनाए रखने यह फैसला किया गया है। वहीं सेवा प्रदान करने वाले नियामक आयोग भी आधिक्य राशि संचित निधि में जमा कराएंगे। ऐसे संस्थानों के लिए एक समिति बनाई गई है। समिति में सहमति नहीं होने पर मामला मुख्य सचिव को भेजा जाएगा।
नियुक्ति से पहले वित्त विभाग से अनुमति लें
सभी विभागों में होने वाली नियुक्तियों का भी युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। वित्तीय संसाधनों को देखते हुए यह नियुक्तियां होंगी और नियुक्ति से पहले वित्त विभाग से आवश्यक रूप से सहमति लेनी होगी। इसके अलावा वित्त विभाग ने निर्माण विभागों के बजट के लिए कुछ अन्य मापदंड भी तय किए हैं।

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