जीएसपी : वाणिज्य सचिव अनूप वधावन का बयान- अमेरिका से निर्यात नहीं होने देंगे प्रभावित

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भारत और तुर्की से जीएसपी कार्यक्रम के लाभार्थी का दर्जा वापस लेंगे।
नई दिल्ली। वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने कहा है कि अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते मजबूत हैं। व्यापार से जुड़े मुद्दों पर हम वार्ता कर रहे हैं। मगर, मेडिकल उपकरणों के मामले में समझौता नहीं करेंगे। जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेंज (जीएसपी) के फायदों का आर्थिक मूल्य बहुत ज्यादा नहीं है। हम अमेरिका से बातचीत जारी रखेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भारत और तुर्की से जीएसपी कार्यक्रम के लाभार्थी का दर्जा वापस लेंगे
बताते चलें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भारत और तुर्की से जीएसपी कार्यक्रम के लाभार्थी का दर्जा वापस लेंगे। ट्रंप ने सोमवार को वहां की संसद को यह जानकारी दी। अमेरिकी कानून के मुताबिक यह बदलाव नोटिफिकेशन जारी होने के 2 महीने बाद लागू होंगे।
अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों को विशेष तरजीह दी जाती है। अमेरिका उन देशों से एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लेता। इसके तहत भारत को 5.6 अरब डॉलर (40,000 करोड़ रुपए) के एक्सपोर्ट पर छूट मिलती है। जीएसपी से बाहर होने पर भारत को यह फायदा नहीं मिलेगा। भारत जीएसपी का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि उन्हें भारत से यह भरोसा नहीं मिल पाया है कि वह अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। अमेरिका का कहना है कि भारत में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है। भारत जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है।
यूएस हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी को लिखे एक पत्र में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने तय किया था कि नई दिल्ली ने संयुक्त राज्य अमेरिका को यह आश्वस्त नहीं किया है कि वह भारत के बाजारों में अमेरिका को न्यायसंगत और उचित पहुंच मुहैया कराएगा। मैं यह आकलन करना लगातार जारी रखूंगा कि क्या भारत सरकार ने जीएसपी पात्रता मानदंड के अनुसार, अपने बाजारों में अमेरिकी समान को उचित पहुंच दी है या नहीं। इस पत्र की एक कॉपी प्रेस को जारी की गई थी।
एक अलग पत्र में ट्रंप ने कांग्रेस को जानकारी दी है कि वह तुर्की के जीएसपी लाभार्थी दर्ज को भी खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से इसलिए जरूरी है कि पिछले करीब साढ़े चार दशकों में तुर्की की अर्थव्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय में वृद्धि, गरीबी की दर में गिरावट और व्यापारिक साझेदार और क्षेत्र द्वारा निर्यात विविधीकरण तुर्की के आर्थिक विकास के स्तर में वृद्धि के सभी प्रमाण हैं।

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