बसंत पंचमी आज : देश में हैं माता सरस्वती के 7 प्रसिद्ध मंदिर

आज बसंत पंचमी का पर्व है। इस दिन देवी सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही पीले वस्त्रों को भी धारण किया जाता है। सरस्वती माता इस दिन अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। हम आपको सरस्वती मां के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताएंगे जो कि श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। यह सभी मंदिर विख्यात होने के साथ-साथ रहस्यों और कहानियों के लिए जाने जाते हैं।
श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर आंध्र प्रदेश का

 

शास्त्रों के अनुसार, महाभारत के युद्ध विराम के बाद इसी जगह वेदव्यास ने देवी सरस्वती की तपस्या करी थी। जिससे खुश होकर माता सरस्वती ने उन्हें प्रकट होकर दर्शन दिए थे। देवी के आदेश पर उन्होंने तीन जगह तीन मुट्ठी रेत ली, चमत्कार स्वरूप रेत सरस्वती, लक्ष्मी और काली प्रतिमा में बदल गई। आज भी यहां तीनों देवी विराजमान होकर अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। भारत के कोने-कोने से यहां लोग दर्शन करने आते हैं। बसंत पंचमी के दिन यहां माता के दर्शन का विशेष महत्व है। कहते हैं इनके दर्शन से अज्ञान का अंधकार मिट जाता है।
मूकाम्बिका मंदिर केरल

दक्षिण मूकाम्बिका के नाम से प्रसिद्ध केरल का प्रसिद्ध मंदिर देवी सरस्वती को समर्पित है। एरनाकुलम जिले में स्थित इस मंदिर में मुख्य देवी सरस्वती के अलावा भगवान गणेश, विष्णु, हनुमान और यक्षी की प्रतिमा स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार यहां के राजा देवी मूकाम्बिका के भक्त थे और हर साल मंगलौर के कोल्लूर मंदिर में जाकर देवी के दर्शन किया करते थे। राजा जब बूढे हो गए तो हर साल मंदिर जाने में इन्हें परेशानी होने लगी। भक्त की आस्था का भक्ति को देखकर देवी मूकाम्बिका राजा के सपने में आईं और राजा से कहा उनका मंदिर बनवाएं और यहीं उनके दर्शन करें। यहां देवी सरस्वती की मूर्ति पूर्व दिशा की ओर मुंह करके विराजमान है। मंदिर में 10 दिनों का उत्सव जनवरी और फरवरी महीने में मनाया जाता है। यहां विद्यारंभ उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें बच्चों का विद्यारंभ संस्कार किया जाता है।
शारदाम्बा मंदिर श्रृंगेरी कर्नाटक

आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठों में पहला मठ ऋृगेरी शारदा पीठ है जिसकी स्थापना आठवीं सदी में हुई थी। यह पीठ शारदाम्बा मंदिर के नाम से विख्यात है। इस मंदिर में पहले चंदन की लकड़ी से बनी देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित थी जिसे आदिगुरु शंकराचार्य ने स्थापित किया था। इस मूर्ति को 14वीं सदी में बदल दिया गया और इसकी जगह सोने की मूर्ति स्थापित की गई। इस मंदिर में सरस्वती देवी के अलावा स्फटिक का शिवलिंग भी स्थापित है जिसके बारे में कहा जाता है कि इस शिवलिंग को भगवान शिव ने स्वयं शंकराचार्य को दिया था। माघ शुक्ल सप्तमी यानी बसंत पंचमी सरस्वती पूजा के दिन यहां माता की पूजा भव्य रूप से की जाती है। नवरात्र और अन्य कई अवसरों पर भी विशेष पूजा का आयोजन होता है।
मध्यप्रदेश में स्थित मैहर का शारदा मंदिर

मध्यप्रदेश के सतना जिले त्रिकुटा पहाड़ी पर मां दुर्गा के शारदीय रूप देवी शारदा का मंदिर है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि आल्हा और उदल नाम के दो चिरंजीवी कई वर्षों से रोज देवी की पूजा कर रहे हैं।
राजस्थान का पुष्कर स्थित सरस्वती मंदिर

राजस्थान के पुष्कर में विश्व का इकलौता ब्रह्मा मंदिर है। ब्रह्मा मंदिर से कुछ दूर पहाड़ी पर देवी सरस्वती का मंदिर है। मान्यता है कि ब्रह्माजी की पत्नी ने सिर्फ पुष्कर में ही पूजे जाने का श्राप दिया था।

सरस्वती उद्गम मंदिर माणा गांव उत्तराखंड


उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम से 3 किलोमीटर की दूरी पर सरस्वती नदी के उद्गम तट पर मां सरस्वती का एक छोटा सा मंदिर है। मान्यता है कि सृष्टि में पहली बार इसी स्थान पर देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसी स्थान पर व्यासजी ने माता सरस्वती की पूजा करके महाभारत और अन्य पुराणों की रचना की थी। यहां सरस्वती की जलधारा के ऊपर सूर्य की रोशनी में सतरंगी किरणें नजर आती हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि ये सरस्वती के वीणा के तार हैं।

धार स्थित भोजशाला में सरस्वती मंदिर


मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला में प्रतिवर्ष बसंत पंचमी पर सरस्वती माता के आराधकों का मेला लगता है। इस स्थान पर मां सरस्वती की विशेष रूप से इस दिन पूजा-अर्चना होती है। यह मंदिर वास्तु शिल्प का अनुपम प्रतीक है। पुराणों के अनुसार राजा भोज सरस्वती माता के भक्त थे। उनके काल में सरस्वती की आराधना का विशेष महत्व था। वर्ष में केवल एक बार बसंत पंचमी पर भोजशाला में मां सरस्वती का तैलचित्र ले जाया जाता है, जिसकी आराधना होती है। यहां पर बसंत पंचमी के दौरान कई वर्षों से उत्सव आयोजित हो रहे हैं।

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