इंफोसिस की फॉरेंसिक आॅडिट कर सकता है सेबी, अब सच में बढ़ सकती हैं कंपनी की मुश्किलें

नई दिल्ली
इंफोसिस पिछले कुछ महीनों से वित्तीय अनियमितताओं के आरोप झेल रही है। लेकिन अब मार्केट रेगुलेटर की सख्ती देखकर लगता है कि कंपनी की मुश्किलें सही मायने में बढ़ सकती हैं। मार्केट रेगुलेटर स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड आॅफ इंडिया (सेबी) कंपनी की बैलेंस शीट की फोरेंसिक आॅडिट कराने की तैयारी में है। पिछले साल इंफोसिस के ही एक व्हिसलब्लोअर ने कंपनी पर वित्तीय गड़बड़ियां करने का आरोप लगाया था। सूत्रों के मुताबिक आरोपों की गहराई से जांच के लिए सेबी अब इंफोसिस की बैलेंस शीट की फोरेंसिक आॅडिट करा सकता है। सेबी का यह फैसला इंफोसिस के इंटर्नल आॅडिट कमिटी की 10 जनवरी की रिपोर्ट के बाद आया है। कंपनी की अंदरूनी जांच में यह बताया गया कि व्हिसलब्लोअर के आरोप बेबुनियाद हैं। कंपनी ने इटर्नल आॅडिट की रिपोर्ट रेगुलेटर को भी दी थी। लाइव मिंट के मुताबिक इस मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया, "कंपनी की इंटर्नल रिपोर्ट के नतीजे सेबी के लिए बेमतलब हैं। सेबी अब इस मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक आॅडिटर नियुक्त कर रहा है।

बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में कंपनी के अंदर से किसी ने स्टॉक एक्सचेंजेस को जानकारी दी कि कंपनी के कुछ टॉप लीडर्स वित्तीय गड़बड़ियां कर रहे हैं, जिसके बाद नवंबर में सेबी ने आरोपों की जांच शुरू की थी। कंपनी में काम करने वाले कुछ गुमनाम कर्मचारियों ने 17 सितंबर को बोर्ड को एक खत लिखा था, जिसमें उएड सलिल पारेख और उऋड निलंजन रॉय पर पिछली दो तिमाहियों (अप्रैल-सितंबर) में मैनेजमेंट और अकाउंटिंग में कई तरह की गड़बड़ियां करने का आरोप लगाया था। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने शॉर्ट टर्म प्रॉफिट बढ़ा हुआ दिखाने और खर्चों को कम दिखाने के लिए अनियमतिताएं की थीं। हालांकि कंपनी की बैलेंस शीट पर भरोसा जताते हुए चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा था कि भगवान भी कंपनी के नंबर नहीं बदल सकते। इस पर सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा था कि जांच चल रही है, बाकी इसके बारे में नंदन नीलेकणि या फिर भगवान ही बता सकते हैं।

नवंबर में यह जानकारी भी सामने आई थी कि कंपनी पर आरोप लगाने के पीछे को-फाउंडर का भी हाथ है। उस वक्त एक एक्सलूसिव जानकारी मिली थी कि किसी को-फाउंडर और पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने व्हिसलब्लोअर के साथ मिलकर कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सूत्रों के मुताबिक को-फाउंडर और पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने व्हिसलब्लोअर को जानकारी दी। इसी जानकारी के बल पर व्हिसलब्लोअर ने कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठाए थे। व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाया कि कंपनी के प्रबंधन की तरफ से मुनाफा और आय बढ़ाने के लिए अनैतिक कदम उठाए गए। इन आरोपों के बाद कंपनी का शेयर 16 फीसदी टूटा था।

 

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