मप्र : 256 नगरीय निकायों का कार्यकाल खत्म,नहीं हो सके समय पर चुनाव

भोपाल// सत्ता में आए सालभर से अधिक वक्त होने के बावजूद मप्र की कांग्रेस सरकार अब तक नगरीय निकाय चुनाव कराने का साहस नहीं जुटा सकी है। इसके चलते प्रदेश के 256 नगरीय निकायों का कार्यकाल खत्म हो चुका है और इनमें सरकार को प्रशासक नियुक्त करने पड़ रहे हैं।
सता रहा पराजय का भय
बीते लोकसभा चुनाव में कड़ी पराजय का सामना कर चुकी कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव को लेकर फूंक -फूंक कर कदम रख रही है। दरअसल वह चुनाव के नतीजों को लेकर आशंकित है। उसे पराजय का भय सत्ता रहा है।
आलम यह है ,की उसने महापौर व अध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने व परिसीमन की अवधि चुनाव से 2 माह पहले तक होने जैसे निर्णय लिए। यही नहीं पार्टी की और से ईवीएम की जगह मतपत्रों से चुनाव कराये जाने की मांग राज्य निर्वाचन आयोग से की गई .
मप्र भाजपा का आरोप है की कांग्रेस प्रदेश को लालटेन युग में वापस ले जाना चाहती है। मतपत्रों से चुनाव की मांग इसलिए की गई ताकि वह फर्जी मतदान करवा सके।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन भी नहीं
निकाय चुनावों में पहले ही देरी हो चुकी है, लेकिन आयोग उसके बारे में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन भी नहीं कर पाया है। कोर्ट ने स्थानीय चुनाव समय पर कराने के निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय चुनावों के एक मामले में जो आदेश दिए थे, उसमें उसने साफ कहा है, कि राज्य निर्वाचन आयोग समय पर चुनाव नहीं कराने के लिए बेवजह कोई बहाना नहीं बना सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को उसकी ताकत का अहसास कराते हुए भी कहा है कि आपके पावर भारत निर्वाचन आयोग से कम नहीं हैं। इसके बावजूद मप्र में समय पर चुनाव नहीं हो पा रहे हैं।
15 फरवरी तक होना है आरक्षण
नगरीय निकायों के लिए वार्ड आरक्षण की आखिरी तारीख पहले 30 दिसंबर निर्धारित थी, लेकिन परिसीमन में गड़बड़ियों के कारण इसे 30 जनवरी कर दिया गया।

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