MP: पिछली बारिश में बहे नवनिर्मित पुल,पुलियों की जांच रिपोर्ट अब नस्तियों में “ढही”

शिवपुरी जिले में चंबल पर कूनो के समीप बना पुल लोकार्पण के पांच माह बाद ही गत 11 सितंबर को ध्वस्त हो गया। लागत 7.7 करोड़, मप्र-राजस्थान को जोडऩे का एक अहम माध्यम। निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी,जिम्मेदार कोई नहीं।
भोपाल। मध्यप्रदेश में चंबल, कूनो और कुआरी जैसे पुलों के ध्वस्त होने पर खूब हंगामा मचा, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पाई। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इस मुद्दे से अपनी नजरें ही फेर लीं। निर्माण के चंद महीने बाद ही बहे शिवपुरी जिले के कूनो पुल की जांच समिति ने तो गुणवत्ता अच्छी बता दी। सरकार अब कह रही है कि जांच रिपोर्ट का भी परीक्षण करवाएंगे।
जिम्मेदारों ने आंखें मूंदी,दोषियों पर कार्रवाई नहीं

प्रदेश में शिवपुरी जिले में कूनो नदी पर बना पुल लोकार्पण के पांच महीने बाद ही बह गया। हादसे के बाद मामले में खूब हंगामा हुआ, लेकिन जांच की घोषणा कर मामला शांत कर दिया गया। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में पुल की गुणवत्ता अच्छी बता दी, जिसके आधार पर न्यायालय में संबंधित इंजीनियरों को राहत मिल गई।
 चंबल पर यातायात अब भी बंद, वैकल्पिक इंतजाम नहीं
उधर, मंदसौर जिले में चंबल नदी पर बना पुल भी भारी बारिश के चलते बह गया, पुल करीब नौ साल पहले बना था। इस हादसे को कई महीने बीत गए, लेकिन जांच रिपोर्ट का अब तक कोई पता नहीं। आलम यह है,कि पुल अब भी नदी में लटका है और  क्षेत्रीय नागरिकों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं की गई।

दोनों स्थानों पर नए पुल बनाना तो दूर विभाग में इन्हें लेकर कोई चर्चा तक नहीं। अलबत्ता सहकारिता मंत्री डॉ.गोविंद सिंह के प्रभाव को देखते हुए भिंड जिले में ओमरी से पूफ गांव में कुआरी नदी पर ध्वस्त हुए पुल पर पुननिर्माण का काम शुरू कर दिया गया है।
 प्रयोगशाला में परीक्षण कराए बिना दे दी क्लीन चिट
विभागीय विशेषज्ञों का कहना है कि पुल निर्माण के समय अधिकतम पानी और बाढ़ की स्थिति का पूर्व आकलन कर ही मजबूती का ध्यान रखा जाता है। सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ, लेकिन जिम्मेदारी किसी की तय नहीं हो पाई। जांच समिति द्वारा पुल निर्माण में उपयोग की गई सामग्री (गिट्टी, सीमेंट, रेत और सरिया) आदि का बिना प्रयोगशाला में परीक्षण कराए क्लीनचिट दिया जाना समझ से परे है।
मौके पर भौतिक निरीक्षण के बाद ही गुणवत्ता अच्छी बताकर निर्माण से जुड़ी एजेंसी और इंजीनियरों को क्लीनचिट दे दी गई, लेकिन समिति ने तकनीकी रूप से यह स्पष्ट नहीं किया कि इतना मजबूत पुल आखिर टूटा कैसे।  समिति ने किसी को जिम्मेदार ही नहीं ठहराया।
 क्लीन चिट मिली तो हो गए बहाल
इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर न्यायालय  से संबंधित इंजीनियरों का निलंबन बहाल हो गया। चंबल नदी के मामले में अभी जांच ही शुरू नहीं हो पाई।
कटनी-मैहर मार्ग पर निर्माणाधीन पुल के स्पॉन में क्रेक आने की जांच अगस्त 2019 में हो गई, लेकिन यह जांच रिपोर्ट भी गोलमोल तैयार की गई। इसके चलते किसी को जवाबदेह नहीं ठहराया जा सका। वहीं सरकारी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी भी इन रिपोर्ट्स को लेकर खामोशी अख्तियार किए हुए हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here