मप्र : शिक्षा में नवाचार के लिए प्रसिद्ध रहे भौतिक विज्ञानी डॉ. कपूरमल जैन का निधन

भोपाल। भौतिक विज्ञानी डॉ. कपूरमल जैन का 28 अक्टूबर को देहावसान हो गया। भौतिकी के निष्‍णाात प्राध्यापक जैन शिक्षा में नवाचार और आदर्श गुरु के तौर पर ख्‍यात थे।
निष्णात विज्ञान-संचारक और राष्ट्रभाषा हिन्दी में विज्ञान के सुलेखक डॉ. कपूरमल जैन ने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के उद्देश्य से स्थापित मध्यप्रदेश के पहले उत्कृष्ट शिक्षा संस्थान, भोपाल में भौतिकी विषय का अध्यापन किया था। वे महात्मा गांधी विश्वविद्यालय चित्रकूट में भी भौतिकी के प्राध्यापक रहे।
शासकीय महाविद्यालय आष्टा के प्राचार्य पद का दायित्व निभाते हुए डॉ. जैन ने अनेक नवाचारी प्रयोग किए और विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान की नींव सुदृढ़ करने के कारगर उपाय किए। उनके द्वारा प्रस्तावित अनेक नवाचारी कार्यक्रमों को मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने लागू किया। वे उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश में संयुक्त संचालक भी रहे।
सौ से अधिक शोध पत्र जर्नलों में प्रकाशित
डा. कपूरमल जैन के भौतिक शास्त्र में सौ से अधिक शोध पत्र देश-विदेश के प्रतिष्ठित शोध जर्नलों में प्रकाशित हुए। आपकी प्रकाशित पुस्तकें हैं – ‘हरि राह’ (विश्व प्रकृति निधि-भारत); ‘जिज्ञासाओं के गर्भ में वैज्ञानिक चेतना’; ‘प्रायोगिक भौतिक’ तथा ‘महाविद्यालय भौतिकी’ (मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी); ‘बेसिक्स आफ थर्मल एण्ड स्टेटिस्टीकल फिजिक्स’ तथा ‘इंट्रोडक्टरी क्वांटम मैकेनिक्स एण्ड स्पेक्ट्रोस्कोपी’ (साउथ एशियन पब्लिकेशन); ‘1905 में भौतिकी की क्रांति’ (मध्यप्रदेश विज्ञान सभा) और ‘घर-घर में विज्ञान एवं भौतिकी की विकास यात्रा’ (आईसेक्ट-मेपकास्ट)।
अनेक संस्थानों ने पुरस्कृत और सम्मानित किया
डॉ. जैन की शिक्षा और विज्ञान साधना को अनेक संस्थानों ने पुरस्कृत और सम्मानित किया। माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान की परियोजना के लिए डॉ. कपूरमल जैन ने प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए व्यावहारिक आचार संहिता तैयार की। इसके दस हजार से अधिक ब्रोशर मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में वितरित किए गए।

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