कांग्रेस विधायकों को लेकर गोवा भाजपा में घमासान

पणजी // गोवा में कांग्रेस विधायकों को बिना वरिष्ठ नेताओं से चर्चा किए और उन्हें विश्वास में लिए पार्टी में शामिल करने को लेकर कई वरिष्ठ नेता बीजेपी लीडरशिप से नाराज हैं। बीते दिनों कांग्रेस विधायकों सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोपते को बीजेपी में शामिल किया गया है, जिसे लेकर कई नेता खुलकर गोवा लीडरशिप की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने योग्य कार्यकर्ताओं को अनदेखा करने और धोखा देने के लिए बीजेपी यूनिट के विघटन की मांग की है।

                           (पार्टी के वरिष्ठ नेता अनदेखी किए जाने से नाराज हैं।)

बीजेपी के इन वरिष्ठ नेताओं में राज्य में बीजेपी के संस्थापक सदस्य पूर्व सीएम लक्ष्मीकांत परसेकर, पूर्व स्पीकर राजेंद्र आर्लेकर और पूर्व मंत्री दयानंद मांडरेकर शामिल हैं। इनका यह भी कहना है कि बीजेपी को विनय तेंदुलकर को हटाकर नए राज्य नेतृत्व को मौका देना चाहिए, साथ ही कोर कमिटी को भी पार्टी की बेहतरी के लिए बदलने की जरूरत है। ये तीनों नेता एक नौ सदस्यीय कोर कमिटी के सदस्य हैं और कमिटी मेंबर्स से चर्चा किए बिना पार्टी द्वारा लिए गए फैसले पर नाराज हैं।

पारसेकर ने कहा कि पार्टी में एक या दो लोग थे, जिन्होंने महसूस किया कि वे मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बीमार होने के दौरान अपने हिसाब से पार्टी चला सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी एक कैडर आधारित पार्टी है और हमें ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो संगठन को मजबूत कर सके। हमें पूर्णकालिक सचिव की जरूरत है और हम एक पूर्णकालिक राज्य अध्यक्ष भी चाहते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि सचिव राज्य से होना चाहिए ताकि वह जमीनी कार्यकर्ताओं को समझ सके।

वर्तमान में, तेंदुलकर राज्यसभा में भी गोवा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि विजय पुराणिक, जो राज्य के महासचिव (संगठन) हैं, महाराष्ट्र के प्रभारी भी हैं। पारसेकर ने कहा, ‘एक व्यक्ति को छह साल के लिए राज्यसभा का सदस्य नियुक्त किया गया है। ऐसे में पार्टी के लिए काम करने के लिए सप्ताहांत पर राज्य कौन आएगा, वह पार्टी की संभावनाओं में मदद नहीं कर सकेगा।’

आर्लेकर ने भी तेंदुलकर की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए पूर्णकालिक अध्यक्ष की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘कोई सेवा या व्यवसाय के साथ-साथ पार्टी नहीं चला सकता। हमें एक राज्य अध्यक्ष की जरूरत है।’ पार्टी मामलों के प्रबंधन में तेंदुलकर की क्षमता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्लेषण करने का समय है कि वह ‘सक्षम’ हैं या नहीं।

पारसेकर ने कहा, ‘पार्टी अध्यक्ष को राज्य भर में यात्रा के लिए उपलब्ध होना चाहिए। सचिव, पार्टी अध्यक्ष और उनकी टीम अच्छी होनी चाहिए। फिलहाकर, हमारे पास एक सचिव है जो महाराष्ट्र की देखभाल करते हैं और जब भी राज्य या कोर कमिटी की कोई बैठक होती है तभी वह आते हैं।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या दो कांग्रेस विधायकों को शामिल करने के लिए पार्टी में नाराजगी है, तो आर्लेकर ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने यह भी महसूस किया है कि ऐसा नहीं होना चाहिए था।

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