छग : मन जहां इत्मिनान महसूस करें, वही वास्तविक जनतंत्र- अपूर्वानंद

रायपुर // राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आहुत दो दिवसीय विशेष सत्र के दूसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और संसदीय कार्य मंत्री श्री रवीन्द्र चौबे, सहित विधानसभा के सदस्य गांधी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित व्याख्यानमाला कार्यक्रम में शामिल हुए।
व्याख्यानमाला कार्यक्रम विधानसभा परिसर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी प्रेक्षागृह में आयोजित था। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध विचारक और प्रोफेसर डॉ. अपूर्वानंद ने व्याख्यानमाला में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों, विचारों तथा उनके दर्शन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने गांधी जी के विचारों और दर्शन को आत्मसात कर जीवन को सम्मानपूर्वक जीने तथा राष्ट्र सेवा के प्रति गांधी जी की संकल्पनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
श्री अपूर्वानंद ने मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष सहित विधानसभा सदस्यों को गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने जिस संसदीय लोकतंत्र की परिकल्पना की है, उसमें संसदीय आचरण का पालन करते हुए सभी वर्गों के हित के लिए विचार-विमर्श करना और उनके लिए कानून बनाना शामिल है। श्री अपूर्वानंद ने बताया कि गांधी जी सर्वोदय की बात किया करते थे। उन्होंने कहा कि एक भी व्यक्ति का मन जहां इत्मिनान महसूस करें, वही वास्तविक जनतंत्र है।
उन्होंने यह भी बताया कि बहुसंख्यकवादी विचार समाज के लिए नुकसानदायक है। जो गांधी जी के सिद्धांतों के विरूद्ध है। श्री अपूर्वानंद ने बताया कि गांधी जी कहा करते थे राजनीति जीवन का अभिन्न अंग है, इसे मनुष्य जीवन को संगठित करने के रास्ते के रूप में देखना चाहिए।
श्री अपूर्वानन्द ने बताया कि गांधी जी के लिए प्राथमिक इकाई ’व्यक्ति’ है। उन्होंने बताया कि गांधी जी के अनुसार स्वराज का अर्थ व्यक्ति का स्वयं पर राज है। श्री अपूर्वानंद ने गुजराती कवि नर्मद के उद्धृत तथ्यों से बताया कि गांधी जी मानते थे, कि अपमान का लंबा जीवन जीने से अच्छा है, अपमान के लिए लड़ते-लड़ते जीवन खो देना। गांधी जी का सिद्धांत नाइंसाफी के खिलाफ अहिंसात्मक रूप से लड़ना और सेवा भाव था।
उन्होंने बताया कि गांधी जी के अनुसार कोई भी सभ्यता सभ्यता नहीं है, जो बड़ी आबादी का दमन कर रही हो। यह बात उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में महसूस किया। उन्होंने बताया कि गांधी जी अच्छा जीवन जीने के लिए जीवन के सिद्धांतों को ढूंढते रहे। उन्होंने अच्छे जीवन के लिए बराबरी, सेवा और अपमान बर्दाश्त न करने के सिद्धांत पर बल दिया। श्री अपूर्वानंद ने कहा कि राजनीति में सेवा का प्रवेश गांधी जी के जरिए होता है।
गांधी जी के लिए आजादी की लड़ाई सिर्फ भारत से अंग्रेजों को हटाने की लड़ाई न होकर अपमान बर्दाश्त न करने की लड़ाई थी। गांधी जी का राष्ट्रवाद संकीर्ण न होकर अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रवाद था। उनके आंदोलन के समर्थन में कई विदेशी शामिल हुए, जो बाद में उनके विचारों के पूरी दुनिया में प्रवर्तक हो गए। गांधी जी ने व्यवस्था संतुलन को निजी विश्वास से अधिक बल दिया। गांधी जी ने बताया कि जीवन पद्धति के संरक्षण और विकास के मौके पैदा करना ही जनतंत्र का सिद्धांत है।

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