मप्र : बिजली मामले में एक हाथ से देकर दूसरे से वसूलने की कवायद

बिजली: एक हाथ से देकर दूसरे से वसूलने की कवायद
भोपाल। बिजली प्रदेश में एक बार फिर राजनीति का मुद्दा बनी हुई है। कांग्रेस के सत्ता में लौटते ही प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के लिए बिजली की अघोषित कटौती सरकार पर हमला बोलने के लिए प्रमुख अस्त्र साबित हो रही है तो कांग्रेस सरकार इसकी काट खोजने नित नए जतन कर रही है। आम उपभोक्ता के लिए कौन ज्यादा मददगार है,इस होड़ में बिजली कंपनी मोहरा बन गयी हैं.

 

बिजली: एक हाथ से देकर दूसरे से वसूलने की कवायद
पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने अपने शासनकाल के अंतिम छ:माही में गरीबों के लिए ‘संबल’ योजना लागू कर इस श्रेणी के बिजली उपभोक्ता को भी दो सौ रुपए में भरपूर बिजली उपयोग की छूट दी थी । योजना तो लोकप्रिय हुई,लेकिन चुनाव में भाजपा को इसका भरपूर फायदा नहीं मिल सका और वह सत्ता से बाहर हो गई। बाद में इसी योजना को उसने सत्तारूढ़ कांग्रेस के खिलाफ हथियार बनाया।
नाम में बदलाव कर राज्य सरकार ने भी इंदिरा ज्योति योजना में ‘संबल’ के उपभोक्ताओं के लिए राहत जारी रखी लेकिन बात बनती न देख अब 150 यूनिट तक की खपत वाले अब सभी वर्गों के लिए सौ रुपए में 100 यूनिट बिजली देने का फैसला लिया। वहीं इससे ऊपर की 50 यूनिट का सामान्य दरों से भुगतान करना होगा। इस फैसले के बाद योजना को लागू करने में सरकार पर 2100 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। सरकार का दावा है,कि इससे प्रदेश के करीब एक करोड उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।
सरकार अब इसका जोर-शोर से प्रचार कर रही है। सोमवार को राज्य मंत्रिपरिषद के फैसले को अधिक प्रचार न मिलने पर मंगलवार को ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पे्रस कांफें्रस कर सरकार के इस फैसले को गिनाया,लेकिन अघोषित कटौती के चलते उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को दूर करने का वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। खास बात यह कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही अचानक बिजली गुल होने पर उन्हें इस हकीकत का सामना खुद ही करना पड़ा ।
बहरहाल,सरकार का दावा है,कि बिजली की 150 यूनिट तक खपत करने वाले जिन उपभोक्ताओं के बिल अभी तक 1255 रुपए आते थे अब वह घटकर 150 सरकार हो जाएगा। यह योजना सभी वर्गों के उपभोक्ताओं के लिए लागू होगी। अभी तक सौ रुपए में सौ यूनिट बिजली का लाभ केवल संबल कार्ड धारक उपभोक्ताओं को ही मिल रहा था,लेकिन सरकार की इस योजना से बडे उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं मिलने वाली। यदि आप 150 यूनिट से अधिक बिजली की खपत करते हैं तो आपका बिल न केवल सामान्य बल्कि बढ़ी हुई दरों के साथ आएगा।
एक हाथ से देकर दूसरे से निकालने की कला
सरकार एक हाथ से देती है तो दूसरे से वापस ले लेती है। सूबे की कमलनाथ सरकार ने बिजली के मामले में ही कुछ ऐसा प्रयोग किया है। डेढ सौ यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं को राहत के मामले में भी उसने ऐसा ही किया। नई योजना में बड़े उपभोक्ताओं को तो कोई राहत पहले ही नहीं मिली। इस पर बिजली की दरों में सात प्रतिशत तक का इजाफा कर उन पर और अधिक भार डाल दिया गया। सरकार के उक्त फैसले से करीब एक पखवाड़ा पहले ही यह बढ़ोत्तरी हुई।

दरअसल,एक तय योजना के अनुसार, बीते माह बिजली कंपनियों ने खुद को करीब 4 हजार करोड़ के घाटे में बताकर नियामक आयोग से बिजली दरों में 12 प्रतिशत के इजाफा करने की इजाजत मांगी थी। आयोग ने थोडी-बहुत ना-नुकुर के बाद इन कंपनियों को सात प्रतिशत दर बढ़ाने की इजाजत दे दी। यानी नई दरों के मुताबिक, आम उपभोक्ता के बिजली बिल में चार सौ से पांच सौ रुपए मासिक का इजाफा होना तय है। इसके लिए चार स्लैब बनाए गए हैं। तीन सौ यूनिट से अधिक खपत पर बिजली की दर साढे छह रुपए प्रति यूनिट रखी गई है। जो इससे पहले करीब पांच रुपए थी।
फिक्स चार्ज के नाम पर पहले ही दोहरी मार
यदि आप अपने बिजली बिल पर गौर करें तो बिजली कंपनी आप से खर्च की गई बिजली की रकम तो वसूलती ही है,इसके अलावा वह अन्य शुल्कों के अलावा एक निर्धारित शुल्क भी वसूलती है। इसे फिक्स चार्ज नाम दिया गया है। यह फिक्स चार्ज एक तरह से दोहरी वसूली का जरिया है। प्रति यूनिट दर के साथ ही इसमें भी बढ़ोत्तरी की गई है। मसलन, अभी उपभोक्ता को 101 यूनिट से 300 यूनिट तक खपत पर शहर में 90 और गांव में 65 रुपए देना होता था। अब यह 23 रुपए प्रति 1 किलोवाट और ग्रामीण के लिए 20 रुपए प्रति आधा किलोवाट पर देना ही होगा। इसकी मार कृषि उपभोक्ताओं पर भी पड़ना तय है।
निगरानी भी बढ़ाई
कमलनाथ सरकार बिजली के मुद्दे पर राज्य में चल रही सियासत को लेकर बेहद सतर्क है। बिजली कंपनियों के कॉल सेंटर के माध्यम से सरकार प्रतिदिन 500 लोगों का फीडबैक जुटा रही है, ताकि उन लोगों से बिजली की उपलब्धता और कटौती की वास्तविक जानकारी मिल सके। बिजली विपक्ष का हथियार न बने इसके लिए उक्ताशय के निर्देश स्वयं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जारी किए।
अब सरकार ने बिजली कंपनियों के कॉल सेंटर्स को निर्देश दिए है कि वह प्रतिदिन 500 उपभोक्ताओं से बातचीत कर फीडबैक लें कि क्या उन्हें बिजली संबंधी कोई शिकायत है। उन्हें बिजली की आपूर्ति नियमित मिल रही है या नहीं। 24 घंटे में कितने बार बिजली गई। बिल उन्हें ज्यादा राशि के तो नहीं मिल रहे। ऐसे तमाम सवालों की प्रश्नावली के साथ कॉल सेंटर्स द्वारा उपभोक्ताओं से जानकारी ली जाएगी। इसके लिए इंटेलीजेंस से लेकर पंचायत तक की इकाई का भी सहयोग लिया जा रहा है। (रवि अवस्थी)

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